
Katsu no Kokage de Ohirune Sureba
樫の木陰でお昼寝すれば
यह कहानी मूल रूप से सितंबर 1976 में प्रकाशित रिबोन के सितंबर 1976 अंक में एक फुरोकू के रूप में प्रकाशित हुई थी, और बाद में इसे रिबोन डिलक्स अक्टूबर 1977 संस्करण में पुनः प्रकाशित किया गया था। इस कथा में पात्रों के एक समूह को एक ऐसे परिदृश्य का सामना करना पड़ता है जहाँ उन्हें छांव में दोपहर की नींद लेने के परिणामों से निपटना होता है। यह मंगा एक सरल परिदृश्य पर केंद्रित है जो इस नींद के प्रभाव और उसके बाद की बातचीत पर आधारित है। ध्यान पात्रों की कार्यों के तत्काल परिणाम पर ही केंद्रित रहता है, बिना व्यापक कथानक के विकास या पात्रों की पृष्ठभूमि का विस्तार किए।