
Mousou Natteru
もう想なってる
आखिर ऐसी चीज़ यहाँ क्यों होगी? ऐसी छोटी-छोटी रोज़मर्रा की पहेलियाँ कथावाचक को एक काल्पनिक मनोदशा में खींच ले जाती हैं। ऐसी बातों को बकवास कहकर खारिज करने के बजाय यह कृति सुझाती है कि शायद वे किसी असली चीज़ की ओर इशारा करती हों, क्योंकि ईश्वर के सिवा कोई भी दुनिया की पूरी कहानी को नहीं समझता।