
Mushi Okuri no Miko
虫葬りの巫女
14 वर्षीय अरिसु हागुरो मुशिज़ुका टाउन में रहती है, जहाँ भाग्य और इतिहास गहराई से जुड़े हुए हैं। वह कीटों को समर्पित एक मंदिर में एक मिको के रूप में सेवा करती है, जिसके साथ एक दुखद जिम्मेदारी जुड़ी हुई है। उसके जीवन में एक नया छात्र आता है, जिसकी पीठ पर ड्रैगनफ्लाई जैसी पंख हैं। वह स्वयं को मनागुरो बताता है, एक स्पिरिट जो मिको की सहायता के लिए बंधा हुआ है। उसकी उपस्थिति अरिसु के शांत जीवन में अशांति फैला देती है। लोगों और कीटों के बीच एक लंबे समय से चली आ रही बंधन है। अब, अरिसु को अपने भाग्य का सामना करना होगा, जो पुरानी टकरावों और मुक्ति की संभावना के बीच फंसी हुई है।