एपि. 18: बोलने की बातों से कर्म ज्यादा मायने रखते हैं
1 अगस्त 2007 को प्रसारित

18
एपिसोड
- एपि. 14 · दैत्य की संतान
- एपि. 15 · सभी अनुकूल परिस्थितियों का निष्कर्ष आता है
- एपि. 16 · पात्र चढ़ाई करने वाले हैं
- एपि. 17 · जुनून है भागता हुआ घोड़ा
- एपि. 18 · बोलने की बातों से कर्म ज्यादा मायने रखते हैं
- एपि. 19 · अपने ही कारण में पुरुष अंधे होते हैं
- एपि. 20 · समृद्धि मित्र बनाती है, कठिनाई उन्हें परखती है
- एपि. 21 · निष्क्रिय दृष्टि केवल स्वप्न ही रहते हैं
- एपि. 22 · ताज धारण करने वाले पर नेतृत्व का बोझ गहराई से होता है