एपि. 21: निष्क्रिय दृष्टि केवल स्वप्न ही रहते हैं
22 अगस्त 2007 को प्रसारित

21
एपिसोड
- एपि. 17 · जुनून है भागता हुआ घोड़ा
- एपि. 18 · बोलने की बातों से कर्म ज्यादा मायने रखते हैं
- एपि. 19 · अपने ही कारण में पुरुष अंधे होते हैं
- एपि. 20 · समृद्धि मित्र बनाती है, कठिनाई उन्हें परखती है
- एपि. 21 · निष्क्रिय दृष्टि केवल स्वप्न ही रहते हैं
- एपि. 22 · ताज धारण करने वाले पर नेतृत्व का बोझ गहराई से होता है
- एपि. 23 · त्वरित असंतोष अक्सर घातक होते हैं
- एपि. 24 · एक कुत्ता चरित्र निर्णायक कारक साबित होता है।
- एपि. 25 · आनंद और शोक पड़ोसी हैं