
Seoreunui Bom
서른의 봄
उन्तीस की उम्र पर और तीसवें दशक की दहलीज़ पर खड़ी कथावाचिका का मन तुलनाओं से भरा रहता है। खुशहाल शादीशुदा सहेलियों या अपने लक्ष्य पा चुके लोगों के सामने वह खुद को छोटी और साधारण महसूस करती है। दफ़्तर में संविदा कर्मचारी होने के नाते उसे नीचा दिखाया जाता है, और घर में शादी के लिए दबाव पड़ता है। वह खुद को समझाती रहती है कि यह आम बात है और सब ऐसे ही जीते हैं, मगर लगभग रातोंरात उसकी शादी की योजना और स्थायी नौकरी की उम्मीद, दोनों ढह जाती हैं। यूँ वह खाली हाथों अपने तीसवें दशक में कदम रखती है।